एक बार सद्गुरु बंदीछोड़ गरीब दास जी महाराज अपने शिष्यों सहित भरतपुर से वापस लौट रहे थे। मार्ग में चलते हुए उन्हें एक कुआं दिखाई दिया। सद्गुरु जी ने शिष्यों से कहा, "हम यहाँ कुछ देर विश्राम करेंगे, स्नान और जलपान करके फिर आगे की यात्रा पर चलेंगे।"
सद्गुरु जी की आज्ञा पाकर सभी शिष्य जल लेने और आस-पास घूमने निकल गए। वहीं कुछ दूरी पर एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था। वह अपने एक नए बैल को बार-बार डंडे से बुरी तरह पीट रहा था, इसके बावजूद वह बैल ठीक से नहीं चल रहा था। दयालु सद्गुरु जी टहलते हुए उस किसान के नजदीक पहुँच गए।
