Saturday, December 31, 2016

वार्षिक कैलेण्डर 2017

पाठी पंडित प्रेम सिंह गरीबदासीय ई-ग्रंथालय की ओर से सर्व संगत को नववर्ष 2017  की हार्दिक शुभकामनाएँ
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शुभ-कामना संदेश संत महापुरुषों की ओर से


सर्व संगत को सर्वोच्य गरीबदासीय पीठ छतरी साहिब मंदिर की आचार्य आदि गद्दी पर विराजमान मेहरबान साहिब श्रीमहन्त दयासागर जी महाराज की ओर से नववर्ष 2017 की हार्दिक शुभकामनाएँ व शुभ आशीर्वाद । नया साल 2017 आप सभी के लिए सुख, समृद्धि, सफलता, यश- कीर्ति, धन-धान्य, सुस्वास्थ्य से परिपूर्ण एवं खुशियों से भरा हो ।
गरीबदासीय त्रिशती महोत्सव (5 मई 2017 से 4 मई 2018 तक 365 दिवसीय)
अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करे: 
9812028340 9812428340

Wednesday, December 28, 2016

स्वामी लालदास जी महाराज (रकबे वाले)


लाली मेरे लाल की, जित देखू तित लाल 
लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल  





पाठी पंडित प्रेम सिंह गरीबदासीय ई-ग्रंथालय की ओर से सर्व संगत को स्वामी लालदास जी महाराज भूरीवालों के अवतार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

Friday, December 23, 2016

महर्षि गंगादास जी के सानिध्य में

हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय के पतिव्रता संत पूजनीय स्वामी रामदेवानन्द जीमहाराज के शिष्य महर्षि गंगादास जी महाराज के सानिध्य में बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी की वाणी का अखण्ड पाठ सेक्टर 6 बहादुरगढ़ में भक्त ओमप्रकाश सुहाग जी के घर चल रहा है जिसकी कुछ झलके आपके पास पंडित प्रेम सिंह गरीबदासीय ई-ग्रंथालय द्वारा पहुंचाई जा रही है. बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी की वाणी के अखण्ड पाठ की पूर्णाहुति दिनांक 25 दिसम्बर को प्रात: 10 बजे होगी जिसके उपरांत साध्वी शील दीदी जी सत्संग फरमायेंगी.सतगुरु जी के दरबार में पहुँचकर हाजरी लगाये 

Saturday, December 17, 2016

300 साला अवतार महोत्सव

सतगुरु जी के प्यारे भक्तों को सत-साहिब जय बन्दीछोड़। आप सभी को यह सूचना देते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि आने वाला साल हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आने वाले साल 2017 में हमारे सत्यपुरुष कबीरावतार बंदीछोड़ गरीबदास साहिब का 300 साला अवतार महोत्सव बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जायेगा।
आप और हम सभी बड़े ही सोभाग्यशाली है जो सतगुरु जी के इस 300 साला अवतार महोत्सव के दर्शन करेंगे। परम धाम श्री छुडानी धाम में इस महोत्सव की तैयारीयां बड़े ही जोरों से चल रही है क्युकी समय काफी कम बचा है। इस सतगुरु जी के इस महोत्सव में आप सभी तन-मन-धन से सहयोग करे, आप अपने इलाको में कार्यक्रम रखवाने का प्रस्ताव 300 साला अवतार महोत्सव आयोजक समिति छतरी साहिब मंदिर छुडानी धाम के पास भेज सकते है।      



Friday, December 2, 2016

सतगुरु ब्रह्मसागर जी महाराज भूरीवालों का निर्वाण दिवस-श्री जलूर धाम का मेला


सतगुरु जी के प्यारे भक्तों को सूचित किया जाता है कि हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय की धुरी के रूप में सुविख्यात तपोनिष्ठ, त्यागमूर्ति संत धन-धन स्वामी सतगुरु ब्रह्मसागर जी महाराज भूरीवालों का ६९ वाँ निर्वाण दिवस आगामी 7-8-9 दिसम्बर 2016 को सतगुरु जी के निर्वाण स्थल श्री जलूर धाम, संगरूर पंजाब में मनाया जायेगा। अत: आप सभी से विनती है कि सतगुरु जी के दरबार श्री जलूर धाम में पहुँच कर अपनी हाजरी लगाये और पुण्य के भागी बने। यह महाआयोजन संत-समागम हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय में कुबेर भण्डारी के नाम से विभूषित म० म० पूजनीय स्वामी विद्यानन्द जी महाराज के सानिध्य में धूम-धाम से सम्पूर्ण होगा।
सम्पर्क सूत्र 01679-283225


Saturday, October 29, 2016

परम धाम श्री छुडानी धाम की यात्रा


               सत साहिब जी, चलिये चलते है परम धाम श्री छुडानी धाम की यात्रा पर  तीर्थ स्थल, देव स्थल तो बहुत है परन्तु परम धाम दो ही है, एक इस संसार के रचियता सत्यपुरुष कबीर साहिब जी का अवतार स्थान परम धाम श्री काशी धाम दूसरा सत्यपुरुष कबीर साहिब जी के ही पूर्ण अवतार उन्ही की ज्योत बंदिछोड गरीब दास साहिब जी का अवतार स्थान परम धाम श्री छुडानी धाम। समय–समय पर भारतवर्ष की पवित्र भूमि पर अनेकों ही संत-महात्माओं ने अवतार लिया और लोगों को संसार में फैलें अंध-विश्वास के प्रति जागरूक किया।  पंजाब में गुरू नानक जी, मारवाड में दादू जी, देश के अन्य हिस्सों में सूरदास जी, मीराबाई जी, तुलसीदास जी, नामदेव जी, ज्ञानेष्वर जी, पलटू साहिब जी अनेक महापुरूष अवतरित हुए।

Wednesday, October 12, 2016

गरीबदासीय वाणी-नित्य नियम का महत्व

सतगुरू श्री गरीबदास महाराज जी के जीवन-इतिहास को यदि गौर से देखें तो पता चलता है कि यह नित्य नियम पाठ की वाणी सतगुरु देव जी ने छोटी आयु में ही उच्चारण करके समस्त शिष्य संगत को उपदेश किया था कि इस वाणी का पाठ प्रतिदिन सुबह-शाम नियमित करो। उस समय से ही समस्त शिष्य संगत सुबह-शांम यह पाठ प्रतिदिन करते आ रहें हैं। सतगुरु देव जी की जीवन लीला से जुड़ी हुई एक कथा भी है कि एक बार दैवयोग से घोड़ों का व्यापार करने वाले कुछ व्यापारी लोग श्री छुडानी धाम आए। सतगुरु देव जी के दर्शन करके उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव हुआ। दर्शन करके अति प्रसन्न हुए। अपने मन में उन्होंने सतगुरू देव जी को अपना गुरू-पीर मान लिया। जब छुडानी धाम से आगे चलनेे लगे तो उन्होंने इक्ट्ठे होकर सतगुरू देव जी के समक्ष प्रार्थना की कि महाराज जी! हमें कोई उपदेश बख्शीस करो जिससे हम अपना व्यापार-कारोबार करते हुए भी अपना मानव जन्म सफल कर लें। 


Thursday, October 6, 2016

परमहंस स्वामी रामदेवा नन्द जी महाराज


पूज्य स्वामी रामदेवा नन्द जी महाराज का जन्म् सन् 1875 में हरियाणा के भिवानी जिले के चरखी दादरी के पास ‘बड़ा पैंतावास’ गांव में एक सम्पन्न ब्राहमण परिवार में हुआ था। आप बाल्यकाल से ही भगवान की भक्ति में रूचि रखते थे। आपने केवल बीस वर्श की आयु में घर त्याग दिया तथा सन्यास लेकर विरक्त महात्माओं के साथ विचरने लगे।

स्वामी दयालु दास जी महाराज

स्वामी दयालु दास जी का जन्म कपिपाल नामक ग्राम में हुआ था | कपिपाल ग्राम भारत वर्ष के पंजाब प्रान्त में है | स्वामी दयालु दास जी के माता-पिता बड़े साधू-सेवी थे | जिसके कारण स्वामी दयालु दास जी को बचपन से ही साधु-संतो की संगति प्राप्त हुई थी | बचपन से ही स्वामी दयालु दास जी परम-पिता परमात्मा के नाम के सिमरन में मग्न रहते थे | स्वामी दयालु दास जी जी की बचपन से ही परमात्मा में अपार श्रद्धा थी |

Friday, September 30, 2016

बीते दिनों हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय के प्रमुख कार्यक्रमों की एक झलक



भादों मेला – छुडानी धाम

1-2-3 सितम्बर को सर्वोच्य गरीबदासीय पीठ छतरी साहिब मंदिर छुडानी धाम में भादों मेला सम्पन्न हुआ । सर्व प्रथम श्रीमहंत दयासागर जी  ने 1 सितम्बर को अपने नित्य नियम के बाद बन्दीछोड गरीब दास साहिब जी के सामने नतमस्तक होकर भादों मेले के सकुशल आयोजित होने के लिये बन्दीछोड गरीब दास साहिब जी से अरदास की ।

Wednesday, September 28, 2016

पाठी पंडित प्रेम सिंह जी


                                                 पाठी पंडित प्रेम सिंह जी का जन्म परम पूज्य प्रात: वन्दनीय बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी के अवतार धाम, लीला धाम, वाणी प्रकटया धाम, मुक्ति के द्वार श्री छुडानी धाम मे पंडित हजारी लाल जी के घर माता जैदेई जी की सुभागी कोख से हुआ | पाठी पंडित प्रेम सिंह जी के पिता पंडित हजारी लाल जी भी बहुत धार्मिक विचारो वाले थे

Tuesday, September 20, 2016

स्वामी जैतराम जी महाराज


ज्योतिपुंज बन्दीछोड़ परम संत गरीब दास जी के प्रांगण को श्री जैतराम रूपी स्फुलिंग ने संवत् १८०४ में आलोकित किया था | आपने इस मायाजगत में अपने अनुज श्री तुरतीराम जी के साथ युगल रूप में पहले प्रवेश किया था | गरीब दास जी की प्रणाली के ये दो स्फुलिंग ‘नाद’ और ‘बिंदी’ प्रशाखाओं के अग्रणी प्रमाणित हुए | जैतराम जी सन्यास ग्रहण कर, अपनी योग्यता व साधना

Tuesday, September 6, 2016

ऐतिहासिक महोत्सव की शुभ सूचना

!! जय बन्दी छोड़ !!                              सत्य पुरुष कबीर साहिब की जय                          !! सत् साहिब !!
                                                          बन्दी छोड़ गरीब दास साहिब की जय

                                                          "ऐतिहासिक महोत्सव की शुभ सूचना"

सादर सप्रेम निमंत्रण                                                                                                     सेवा की शुभ प्रेरणा
गरीबदासीय त्रिशती महोत्सव
 ( भादों मेला 3 सितम्बर 2016 को छतरी साहिब छुड़ानी धाम द्वारा सूचनार्थ, सेवार्थ जारी प्रपत्र एवम् निमंत्रण)

Wednesday, August 31, 2016

श्री सतगुरु ब्रह्म सागर जी महाराज भुरीवाले


गत शताब्दी में पंजाब शेत्र के जनमानस को जाग्रत करने के लिए और सतगुरु गरीबदास जी का संदेश जन-जन तक पहुँचने के लिए गरीबदास जी का तदरूप फिर से अवतरित हुआ | इस रूप को “श्री ब्रह्मसागर जी भूरीवाले ” के नाम से गरीबदासीय सम्प्रदाय में सभी प्रेमी जानते है और बहुत से सज्जन अभी मोजूद है जिन्होंने इस पावन रूप के दर्शन व संगत की है|

Tuesday, August 30, 2016

बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी


                     भारत की पावन वसुंधरा पर समय-समय पर कारक महापुरषो का अवतार हुआ | जिनमे से एक अलौकिक महापुरुष श्री सतगुरु कबीर साहिब जी हुये | सतगुरु कबीर साहिब जी महाराज अपने निज लोक से अपने हंसो के उद्धार के लिए हर युग में यंहा अवतार लेते हैं | सन १७१७ में आचार्य गरीब दास जी महाराज का प्राकटय भी अद्वितीय है | जो हम सब जीवो के उदहार के

सतपुरुष कबीर साहिब जी महाराज


                                                             सन्मार्ग से विचलित और वास्तविक लक्ष्य से भटके हुए मानव को यथार्थ दिशा निर्देश के लिए सत्यपुरुष परमात्मा की दिव्य विभूति को धराधाम पर आना पड़ता है | १५वीं शताब्दी में, ऐसी ही दिग्भ्रमित मानवता व्याकुल हो रही थी | तत्कालीन दो मुख्य धर्मो में परस्पर असहमति व्याप्त थी | हिन्दू-मुश्लिम, पंडित-मोल्ला के वैमनस्य की आंधी फैल रही थी | आध्यात्मिक- नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही थी | लोग रुढियों और अन्धविश्वासो में लिप्त थे| निरकुंश सासक निरीह प्रजा