Saturday, October 29, 2016

परम धाम श्री छुडानी धाम की यात्रा


               सत साहिब जी, चलिये चलते है परम धाम श्री छुडानी धाम की यात्रा पर  तीर्थ स्थल, देव स्थल तो बहुत है परन्तु परम धाम दो ही है, एक इस संसार के रचियता सत्यपुरुष कबीर साहिब जी का अवतार स्थान परम धाम श्री काशी धाम दूसरा सत्यपुरुष कबीर साहिब जी के ही पूर्ण अवतार उन्ही की ज्योत बंदिछोड गरीब दास साहिब जी का अवतार स्थान परम धाम श्री छुडानी धाम। समय–समय पर भारतवर्ष की पवित्र भूमि पर अनेकों ही संत-महात्माओं ने अवतार लिया और लोगों को संसार में फैलें अंध-विश्वास के प्रति जागरूक किया।  पंजाब में गुरू नानक जी, मारवाड में दादू जी, देश के अन्य हिस्सों में सूरदास जी, मीराबाई जी, तुलसीदास जी, नामदेव जी, ज्ञानेष्वर जी, पलटू साहिब जी अनेक महापुरूष अवतरित हुए।

     आम जन को सहज जीवन के आदर्शो से परिचित करवाते हुए मिथ्याचारों एवं बाह्याडम्बरों का वाणी के द्वारा घोर विरोध करने वाले सत्यपुरुष कबीर साहिब जी के ही पूर्ण अवतार बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी का अवतार हुआ। हरियाणा प्रान्त में परम धाम श्री छुडानी धाम में जीवों के त्रीताप क्लेष विशय विकार अनेक दुखों को हरने के लिए बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी ने सन् 1717 में बैसाख पूर्णिमा को श्री बलराम धनखड़ (क्षत्रिय जाट किसान) व माता सरस्वती रानी जी के घर में अवतार लिया। जन्म, म्रत्यु, जरा, व्याधि को छुडाने वाले का नाम छुडानी है । जिन्होंने 24 हजार की संख्या में वाणी ग्रन्थ की रचना की। मात्र 12 वर्श की आयु में गाय चराते हुए खेत में अपने ही मूल स्वरूप इस अखिल ब्रह्मंड के रचियता सत्यपुरुष सतगुरु कबीर साहिब के दिव्य स्वरूप का दर्शन किया।

          बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी ने अपनी वाणी में अनेक स्थानों पर बन्दीछोड़ शब्द का प्रयोग करते हैं, आगे एक स्थान पर तो स्पष्ट कहते हैं:-  
         अमर करूं सतलोक पठाऊं, तातैं बन्दीछोड़ कहाऊं।
बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी का जीवन चरित्र जो हम जीवों से उपलब्ध हो सका वो हम पहले के ब्लॉग में आप सभी के समक्ष ले कर आ चुके है। आगे अलग-अलह संत महात्माओं द्वारा छिपवाये गये बन्दीछोड़ जी के जीवन चरित्र आप सभी को उपलब्ध कराये जायेंगे

आज के इस ब्लॉग का उदेश्य आप सभी को हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय के परम धाम श्री छुडानी धाम के बारे में जानकारी देने के लिए है, हम सभी वहाँ जाते है सतगुरु जी के आगे नतमस्तक होते है, पर वास्तव में हमारी नई पीढ़ी के बहुत से लोगो को यहाँ के इतिहास का पता नही है। आज हमारा प्रयत्न रहेगा की आप सभी को हमारे परम धाम श्री छुडानी धाम के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे सके। यदि आपको हमारी कोई जानकारी ठीक न लगे तो हमसे सम्पर्क करे, हमे बताये हम उसको आपके सहयोग से सुधारेंगे।

परम धाम श्री छुडानी धाम में स्थित सत्यपुरुष की संस्थाएं :-
1 छतरी साहिब मन्दिर
2 अवतार महल मन्दिर
3 अखण्ड वाणी मन्दिर
4 श्री गंगा जी मन्दिर
5 श्री धोंला कुआ मंदिर
6 कबीर दीक्षा स्थल मंदिर
7 कोठी दयालु दास (सदगुरू सन्त मंदिर)
8 कबीर दर्शन स्थल
9 गरीबदासीय रामकुण्ड
10 कबीर दर्शन स्थली

छतरी साहिब मन्दिर-सर्वोच्च गरीबदासीय पीठ, गरीबदासीय पंथ मुख्यालय
वर्तमान समय में लगभग 400 गरीबदासीय धर्म संस्थाएं पूरे विश्व में जनहितार्थ कार्य कर रही हैं। गरीबदासीय सम्प्रदाय में सर्वोच्च गरीबदासीय पीठ, छतरी साहिब, छुड़ानी धाम हैं। यह छतरी साहिब मन्दिर बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी का समाधि स्थल है,  जहां पांच एकड़ भूमि में संगमरमर, ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित विशाल भव्य मंदिर है, जिसका स्वर्णमंडित गुम्बद व रजतमंडित गर्भगृह है। दर्जनों कमरों सहित १८००० वर्ग फीट में २ मंजिला भण्डार गृह है एवं ५००० वर्ग फीट में संतो के लिए संत निवास एवं सत्संग भवन हैं। बन्दीछोड़ जी का सत्यपुरुष धाम होने की वजह से एवं नित्य प्रति नित्यनियम, आचार्य श्री की वाणी का आदि अन्त का पाठ,  हर पूर्णिमा को अखण्ड पाठ, सत्संग प्रवचन व भण्डारा,  चैबीसी घंटे अन्नक्षेत्र की व्यवस्था एवं सन्त सेवा द्वारा इस संस्था का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बैसाख पूर्णिमा, भाद्रपद शुक्ल द्वितीय एवं फाल्गुन द्वादशी (होली से दो दिन पूर्व) को बन्दीछोड़ जी की स्मृति में विशाल पर्व छुडानी धाम में आयोजित किए जाते हैं, जहां लाखों की संख्या में हरियाणापंजाब,  यू0पी0,  राजस्थान सहित पूरे भारतवर्ष से श्रद्धालु छुडानी धाम दर्शनार्थ व सेवार्थ पधारते हैं। छतरी साहिब, छुडानी धाम सत्यपुरूश धाम है, जहां परिक्रमा करके भक्त लोग मुक्ति प्राप्त करने में सक्षम हो जाते हैं, साथ ही लौकिक सुख भी उनको प्राप्त होता।



अभी आप सर्वोच्च गरीबदासीय पीठ छतरी साहिब मन्दिर छुडानी धाम में रजतमंडित गर्भगृह के दर्शन कर रहे है बन्दीछोड़ जी की यह प्रतिमा हमारी गरीबदासीय सम्प्रदाय के त्यागमूर्ति, तपोनिष्ठ संत धन-धन स्वामी ब्रह्मसागर जी महाराज जी भुरीवालों के आदेश पर पंडित विशुद्धानन्द जी ने स्थापित करवाई थी। एक बार पंजाब, दिल्ली,उत्तर प्रदेश, देशतंहा से संगत सत्यपुरुष धाम श्री छतरी साहिब मंदिर छुड़ानी धाम में पहुंची हुई थी | तब किसी ने स्वामी ब्रह्मसागर जी महाराज  भुरीवालो से पुछा कि बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी ने अपनी वाणी में मूर्ति-पूजा का पुरजोर खंडन किया है और आपने यँहा उन्ही की मूर्ति बनवाकर पूजा शुरू करवा दी | स्वामी ब्रह्मसागर जी महाराज  भुरीवालो ने यह बात सुनते ही कहा कोन कहता है की यह पत्थर की मूर्ति है ? यह तो साक्षात् हमारे बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी तेजपुंज के रूप में विराजमान है | हम उन्ही को दण्डवत प्रणाम करते है, उन्ही को भोग लगते है | उन्ही की पूजा करते है किसी पत्थर की मूर्ति को हम नही मानते और हमे तो कोई पत्थर की मूर्ति नजर नही आती |



                                  प्रश्न पुछने वाले ने फिर स्वामी ब्रह्मसागर जी महाराज  भुरीवालो से कहा कि हमे तो बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी नजर नही आ रहे और हमे तो पत्थर की मूर्ति ही नजर आ रही है | तब सतगुरु ब्रह्म सागर जी महाराज  भुरीवालो ने कहा कि अरे तुम्हारे ह्रदय पत्थर के हो रहे है और यदि तुम्हे विश्वास नही तो चलो हम तुम्हे बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी के तेज-पुंज के स्वरूप के दर्शन करवा देते है, आओ हमारे साथ |

                 सारी संगत छतरी साहिब मंदिर के अंदर श्री दरबार साहिब जी में दर्शन करने के लिए पहुँच गई | तब स्वामी ब्रह्म सागर जी महाराज  भुरीवालो ने छतरी साहिब के आगे दण्डवत प्रणाम किया और जब स्वामी ब्रह्मसागर जी महाराज  भुरीवाले  प्रणाम करके उठे तो, बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी की प्रतिमा में से इतना प्रकाश हुआ की सारी छतरी साहिब जगमगा गई |
                 सारी संगत ने बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी के तेजपुंज के रूप के दर्शन किये | स्वामी ब्रह्मसागर जी महाराज  भुरीवाले  प्रतिमा के पीछे खड़े होकर बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी की प्रतिमा को चंवर करने लगे | तब बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब के स्वरूप में से वाणी उच्चारण होने की आवाज सुनाई दी |  और इस प्रकार अपनी आँखों से देखकर शंकावादी लोगों की शंका मिट गई | सभी को निश्चय हो गया की यँहा छतरी साहिब मन्दिर छुड़ानी धाम में साक्षात् बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी हाजर नाजर बैठे है | बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी के श्री मुख से निकले हुए वाक्य है:
            हाजर नाजर है धनी, साहिब दिलदाना रे | पलकों चौरा कीजिये, ता पर कुरबाना रे |

अभी आप सर्वोच्च गरीबदासीय पीठ छतरी साहिब मन्दिर छुडानी धाम के सिंह द्वार के दर्शन कर रहे है


अवतार महल मंदिर
अवतार महल मंदिर श्री छुडानी धाम गाँव के बीच में छतरी साहिब मन्दिर से थोड़ी ही दूरी पर स्थापित है। यहाँ बन्दीछोड़ जी ने माता रानी जी की सुभागी कोख से जन्म लिया था। यहाँ पर बन्दीछोड़ जी जी के पिता जी पूज्य श्री बलराम जी के साथ पूज्य माता रानी जी की प्रतिमा के साथ-साथ बन्दीछोड़ जी बाल-स्वरूप में पलने में विराजमान है। यहाँ पर भी समय-समय पर बन्दीछोड़ जी की वाणी का अखंड पाठ होता है   

                                         अभी आप अवतार महल मन्दिर का दर्शन कर रहे है



अखण्ड वाणी मन्दिर
बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी बचपन से ही अपने ज्ञान को मधुर साखियों व शब्दों के रूप में गाकर प्रकट किया करते थे। शिष्य आप द्वारा उच्चारित वाणी को याद करके उनका पाठ करने लगे। राजस्थान प्रांत में दादूपंथ में दीक्षित संत गोपालदास जी ने कुछ लोगों से बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी की वाणी सुनी। संत-वाणी के मर्मज्ञ एवं विद्वान होने के कारण गोपालदास जी के मन में वाणी के प्रति आकर्षण पैदा हुआ और वे परम धाम श्री छुडानी धाम पहुंच गए। बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी की वाणी सुनी, प्रवचन सुने, तब प्रभावित होकर परमार्थ के लिए गोपालदास जी ने बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी से वाणी को लिखने की आज्ञा मांगी। बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी ने निश्चित स्थान पर वाणी को लिखने की आज्ञा दे दी। उस समय श्री छुडानी धाम गांव में बेरियों के बाग में एक जाण्ड का वृक्ष था। संवत 1797 में फाल्गुन के शुक्ल त्रयोदशी को वृक्ष के नीचे बैठकर गोपालदास जी ने वाणी को लिखने का शुभ कार्य शुरू किया। आज के वर्तमान समय में वह वृक्ष नस्त हो चुका है, उसी जण्ड वृक्ष के स्थान पर आज परम पूज्य माताश्री ओमवती जी की आज्ञानुसार श्रीमहन्त दयासागर जी ने अखण्ड वाणी मंदिर का निर्माण करा चुके हैं, जहां निरंतर अखण्ड पाठ हो रहे हैं बिना रुके वहाँ सदैव बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी की वाणी का जाप चलता रहता है। 

 
                   अभी आप अखण्ड वाणी मंदिर का दर्शन कर रहे है


श्री गंगा जी मन्दिर
श्री गंगा जी मन्दिर छुडानी धाम गाँव से भदानी जाने वाली सडक के कोने पर है। यहाँ एक बहुत बड़ा तालाब है, उसी के किनारे पर श्री गंगा जी मन्दिर है यहाँ बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी ने अपनी माता रानी जी को गंगा स्नान कराने के लिए गंगा जी को प्रकट किया था।
  एक बार की बात है कि छुड़ानी धाम से बहुत लोग गढ़ मुक्तेश्वर गंगा स्नान के लिए जा रहे थे | तब आचार्य गरीब दास जी महाराज की माताश्री रानी जी भी कहने लगी कि बेटा गरीबा मुझे भी गंगा स्नान के लिए ले चल |  महाराज जी ने ऐसे ही   दिन आना-कानी करते हुए निकाल दिये | तब माता जी ने फिर कहा कि बेटा मुझे गंगा स्नान किये कई साल हो गये है, साल भर में यह कार्तिक पूर्णिमा का स्नान महान पुण्य दायक होता है और बड़े ही पुण्ये से प्राप्त होता है, और हमारे देश में गंगा स्नान का बहुत महत्व है, इस माह में तो प्रति-दिन गंगा स्नान करना चहिये | यदि कोई पुरे कार्तिक मास गंगा स्नान न कर पाये तो उसे आखिरी के ५ दिन (एकादसी से पूर्णिमा) तक गंगा स्नान करना चहिये | यदि यह भी न हो पाए तो उसे पूर्णिमा के दिन तो जरुर से भी जरुर गंगा स्नान करना चहिये | इससे पुरे माह के गंगा स्नान का फल मिल जाता है | हमारे गाँव से कितने लोग गए पर न तू मेरे साथ चला और न मुझे जाने दिया |



                        महाराज जी ने कहा कि माता जी मै आपको जरुर गंगा स्नान कराऊंगा |  तब माता ने कहा कि बेटा कैसे? अब तो हम गंगा जी पर भी नहीं पहुँच सकते है तब तुम किस प्रकार मुझे गंगा स्नान कराओगे | महाराज जी ने माता जी को बहुत विश्वास दिलाना चाहा पर विश्वास होता कैसे? यह बात कह कर महाराज जी छुड़ानी धाम से पश्चिम दिशा की ओर चल दिए (तालाब की तरफ) जिसे अब गंगा मैया के नाम से भी जाना जाता है | तालाब के किनारे बैठ कर महाराज जी ने गंगा मैया का आह्वान किया और कुछ ही पलों में वँहा गंगा मैया की निर्मल धरा बहने लगी | अपनी इस आलोकिक लीला को रच कर सत्पुरुष सतगुरु गरीब दास जी महाराज भागे हुए अपनी माता जी के पास आये और माताजी से कहने लगे कि माता जी चलो गंगा स्नान कर लो गंगा मैया आ गई है यंही अपने छुड़ानी गाँव में माता जी ने कहा कि बेटा गंगा जी तो गढ़ मुक्तेश्वर में है वह यहाँ कैसे आ सकती है |  यह बात पुरे छुड़ानी धाम में आग की तरह फैल गई कि गाँव में गंगा मैया प्रकट हुई हैपर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था, कि गंगा मैया छुड़ानी गाँव में आ गई है | तब महाराज ने सोचा कि यदि इन सभी को यहाँ स्नान करा भी दिया तो इनको विस्वास नहीं होगा की इन्होने गंगा मैया में ही स्नान किया है | इसलिए इनको यहाँ गढ़ मुक्तेश्वर ही प्रतीत करना होगा |

                   तब महाराज जी ने कहा कि सब अपनी आँखे बंद कर लो | महाराज जी के कहे अनुसार सभी ने अपनी आँखे बंद कर ली  | कुछ देर बाद आँखे खोली तो देखा कि गंगा जी की विशाल धारा बह रही थी, और वंही गढ़ मुक्तेश्वर दिखाई देने लगा, वही विशाल धरा, भक्तो का स्नान के लिए ताँता, विशाल मेला | इसके बाद सभी ने गंगा स्नान किया, स्नान की तृप्ति के बाद महाराज जी ने पुन: सबको आँखे बंद करने के लिए कहा और बाद में जब आँखे खोली तो देखा कि सब वापिस अपनी जगह छुड़ानी धाम में थे | वास्तव में तो पहले भी सभी छुड़ानी धाम में ही थे | परन्तु बन्दीछोड़ सतगुरु गरीब दास जी महाराज जी ने अपनी लीला से पहले तो गंगा मैया को छुड़ानी धाम में प्रकट किया और फिर छुड़ानी धाम में ही गढ़ मुक्तेश्वर के द्रश्य की लीला रची फिर सभी सोचने लगे कि क्या हमने सच में गंगा स्नान किया है? या कोई सपना देख रहे थे?” | उन लोगों की यह बात सोचना भी उचित था क्युकी इतनी जल्दी गढ़ मुक्तेश्वर जाकर स्नान करके वापिस आना मुमकिन नहीं है यह तो सिर्फ जगत गुरु बाबा गरीब दास जी महाराज जी की आलोकिक लीला के कारण ही संभव हो सका था |


धोंला कुआ मंदिर
जब बन्दीछोड़ जी छोटी आयु में थे तब बन्दीछोड़ जी के पिता जी श्री बलराम जी ने इस धोला कुएं का निर्माण करवाया था। और समय छोटे बालक स्वरूप बन्दीछोड़ जी ने ही बताया था कि कुएं का निर्माण इस जगह करवाइये यहाँ मीठा पानी निकलेगा। धोंला कुआ मंदिर उसी कुए के उपर बन रहा है जिसका निर्माण शुरू हो चूका है जल्द ही सतगुरु जी की दया से पूरा भी हो जायेगा।
        
              अभी आप सभी निर्माणाधीन धोंला कुआ मंदिर के दर्शन कर रहे है 

इस पूरी लीला को पंडित सोहनलाल दिवानामेहन्दपुरी-पंजाब वालों ने एक भजन के द्वारा बड़े ही सुंदर रूप में प्रस्तुत किया है।
एक समय की बात बताऊं जो सुनने में आई। छुड़ानी धाम में पानी खारा, जानै हैं सब भाई।।
डेढ़ कोस पर मीठा पानी, नाथ जहां से देते। जोहड़ से जो मिट्टी निकाले, उसको थे वो देते।।
बलराम जी ने सलाह बनाई, कुआं बनाए यहां पर। गरीबदास जी कहने लगे जो मौजूद थे वहां पर।।
बीस गज का फासला छोड़ो, मीठा पानी है पाये। बच्चा समझ कर बात न मानी, पीछे से पछताये।।
खारा पानी वहाँ पर निकला, दुखी हुए सब सारे। कोई कहे काली जीभ वाला है, कोई कहे नहीं प्यारे।।
जो कुछ कहता ठीक है होता, महान शक्ति है पाय। इस से पूछो कहाँ पर खोदें, मीठा पानी जो आये।।
बीस गज फिर दूर वहां से, जाकर खड़े प्यारे। मीठा पानी वहां से निकला फिर खुष हो गये सारे।।
बड़े उत्साह से सब लोगों ने, शुरू कराई चिनाई। कोठी उस की टेड़ी हो गई, बड़ी हैरानी छाई।।
सब उम्मीदें खत्म हो गई, सारे फिर घबराये। गरीबाचार्य जी फिर कहते पास जो उनके आये।।
अपने आप सब ठीक हो जावे, खराब हुआ है जो जैसे। कहे बलराम जी नुकसान हो गया, ठीक होवेगा कैसे।।
कब होवेगा, कैसे होवेगा, ये बतलाओ प्यारे। आगे से गरीबदास जी बोले, मत घबराओ सारे।।
भूचाल आवेगा ठीक हो जावे, क्यों छाई हैरानी। देखो सतगुरू की मेहर, जो मीठा निकला पानी।।
सब लोग ये बात थे कहते, कब भूचाल है आये। ज्योतिशी, पंडित, सांई स्याने भी, कोई नहीं बतलाये।।
गरीबदास जी प्रेम से बोले, क्यों हो तुम घबराये। पाँचवे दिन रात चैथे पहर को, ऐसा भूचाल है आये।।
सब कुछ ठीक हो जाये आप ही, चिन्ता की नहीं बात। लोग इक्कठे होकर कहते, कैसी होगी वो रात।।
आज तक किसी ने नहीं बताया, ये बालक क्या जाने। अपने अपने ख्याल दौड़ाते, कोई माने न माने।।
पांचवे दिन रात चोथे पहर, भूचाल ने षोर मचाया। त्राहि-त्राहि सब थे करते, प्रभु याद था आया।।
सुबह हुई सब लोग जा देखें, जो कुआं बनाया प्यारे। बिल्कुल कुआं सीधा था पाया, खुष हो गये फिर सारे।।
बचपन से ही गरीबदास जी, ऐसे कौतुक दिखलावै। छुड़ानी धाम में संतो-भक्तों को, अपने पास बुलावें।।
ब्रह्मचारी जो सत्गुरू तेरे, छुड़ानी धाम को जावें। साथ ले जाकर दीवानेको दर्शन करावें।।
भूरीवालों की मेहर से होई, परचा यह लिखवाया। श्री महन्त दयासागर जी का दर्शन मैंने पाया।।
दीवाना महैन्दपुरी लिख यह परचा, दण्डौत प्रणाम है करता। दीवाना बना है सतगुरों का, किया है अपना भरता।।

उपरोक्त सभी संस्थाओं की देख-रेख सर्वोच्य गरीबदासीय छतरी साहिब मंदिर छुडानी धाम के श्रीमहंत जी की अध्यक्षता में होती है।
श्री जैतराम जी व श्री तुरती राम जी बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी की प्रणाली के दो स्फुलिंग नाद’ और बिन्दी’ प्रशाखाओं के अग्रणी प्रमाणित हुए जैतराम जी सन्यास ग्रहण करअपनी योग्यता व साधना सिद्धि के आधार पर नाद’ प्रणाली के प्रमुख शिष्य और एक धुरधामी संत के रूप में स्थापित हुए श्री तुरती राम जी श्री छुड़ानी धाम की गुरु-गद्दी के उतराधिकारी बन कर बिन्दी’ प्रणाली के अग्रज शिष्य के रूप में ख्याति को प्राप्त हुए बिंदी धारा के अंतर्गत आचार्य गरीब दास जी महाराज जी के वंश से ही उतराधिकारी चुना जाता है जो भी उतराधिकारी महाराज जी की गद्धी पर आसीन होता है उसे श्रीमहन्त जी के नाम से जाना जाता है |
 वर्तमान में आंठवे आचार्य गद्दीनशीन श्रीमहन्त दयासागर जी महाराज गद्दी पर विराजमान है | 
वर्तमान आचार्य गद्दीनशीन श्रीमहन्त दयासागर जी इस संस्था के सौजन्य से भारतवर्श के हर प्रान्त में बन्दीछोड़ जी की वाणी का प्रचार व अन्नक्षेत्रों का आयोजन कर रहे हैं। वर्तमान आचार्य गुरुगद्दी नसीन श्रीमहंत दयासागर जी का जन्म २२ नवम्बर १९६१ को कार्तिक पूर्णिमा के दिन मुहूर्त में परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत गंगासागर जी एवं वर्तमान परमपूज्य माताश्री ओमवती जी के यँहा पुत्र रूप में दयासागर जी का जन्म हुआ ४ वर्ष की अवस्था में दयासागर जी को आचार्य आदि गद्दी का तिलक करके परम पूज्य श्रीमहंत गंगासागर जी ने श्रीमहंत की पदवी से विभूषित कियाश्रीमहन्त दयासागर जी बहुत ही मेहनती पुरुषार्थी है। जो एक कर्मठ सेवादार की तरह पंथ प्रचार व छतरी साहिब के कार्यो में प्रयासरत रहते है।

सतगुरु कबीर दीक्षा स्थली
जब आचार्य गरीब दास जी महाराज १० वर्ष की आयु के थे तब उनको परमपिता परमेश्वर सत्पुरुष सतगुरु कबीर साहिब जी महाराज ने दर्शन दिए थे और उसी दिन के उपलक्ष में यह दिवस किरपा पर्व के नाम से मनाया जाने लगा | बात  वि०सं० १७८४ फाल्गुन शु० दवाद्शी की है जब रोजाना की तरह आचार्य गरीब दास जी महाराज गायें चराने खेतो में गए हुए थे | तब वह गायो को अपने और साथियों को सोप कर ध्यान लगा कर एकांत में बैठ गए | कुछ समय बीत जाने पर आचार्य गरीब दास जी के साथी बालक महाराज जी के पास आये | तभी वँहा असंख्यो सूर्यो का प्रकाश आसमान में दिखाई देने लगा जिसको देखकर सब बालक चकित रह गए और सोचने लगे की शायद आज सूर्य देवता धरती पर आ रहे है पर उस प्रकाश में बड़ी ही शीतलता थी तभी एक देवमूर्ति आकाश से पृथ्वी पर आती हुई दिखाई दी ठीक उसी जगह जंहा आचार्य गरीब दास जी महाराज समाधि लगा कर बैठे हुए थे | कुछ बालक कबीर दास जी महाराज को देख कर घबरा गए की पता नहीं कोन आ गया | तभी बालको ने आचार्य गरीब दास जी महाराज को उठाया और कहा कि गरीबा देखो कोन आ आया है" तभी आचार्य गरीब दास जी महाराज ने देखा कि कबीर साहिब जी उनके सामने खड़े है | तभी आचार्य गरीब दास जी महाराज ने कबीर दास जी महाराज जी के चरणों में दण्डवत प्रणाम किया | तब  आचार्य गरीब दास जी महाराज ने प्रार्थना कि महाराज यदि आप आदेश दे तो मै आपके लिए भोजन ले आऊ” | तब कबीर दास जी महाराज ने कहा कि हम भोजन तो नहीं करेंगे पर दूध जरुर पियेंगे | तब आचार्य गरीब दास जी महाराज ने कहा की महाराज जी आपकी की किरपा से बहुत गांये है उनको आपके पास ले आता हूँ फिर आपको जितना दूध पीना हो पी सकते हो”| तब कबीर दास जी महाराज ने कहा कि हम तो बिन बियाई गाय (बछिया) का दूध पियेंगे” | 

तभी आचार्य गरीब दास जी महाराज ने कई बछिया लाकर कबीर दास जी महाराज के सामने खड़ी कर दी और कहा जी महाराज जी जिस बछिया के उप्पर आप हाथ रखोगे उसी का हम दूध आपको पिलायेंगे | तभी कबीर दास जी महाराज ने एक बछिया पर हाथ जो की आचार्य गरीब दास जी महाराज को सबसे प्रिय थी | आचार्य गरीब दास जी महाराज ने बछिया के नीचे बर्तन रखा और फिर उसकी पीठ पर हाथ फेरा जिससे आपने आप ही उस बछिया के सतनो से दूध की धाराये बहने लगी और बर्तन भर गया | तब आचार्य गरीब दास जी महाराज ने वह दूध कबीर दास जी महाराज को दिया तो कबीर साहब ने वह दूध आधा पी कर आचार्य गरीब दास जी महाराज को दे दिया और कहा कि गरीबा अब तुम इसे पियो” | उस समय कबीर साहब ने मर्यादा पालन के लिए आचार्य गरीब दास जी महाराज को उपदेश व दीक्षा दी और तभी वँहा से अंतर्ध्यान हो गए | और उधर आचार्य गरीब दास जी महाराज समाधी में लीन हो गए क्युकि कबीर दास जी महाराज गरीब दास जी महाराज की आत्मा को निकाल कर अपने साथ सतलोक की यात्रा पर ले गए थे | और यँहा प्रथ्वी पर सिर्फ गरीब दास जी महाराज का शारीर था जो उन्होंने इस संसार की मर्यादा के लिए धारण किया हुआ था
   इस यात्रा का वर्णन महाराज जी अपनी वाणी में करते हुए कहते है कि:
गरीब प्रपट्टन की पीठ में, प्रेम प्याले खूब |
 जहाँ हम सद्गुरु ले गया, मतवाला महबूब ||
 (अर्थात महाराज जी कहते है कि उस सतलोक के बाजार के अंदर प्रेम के भरे हुए प्याले बहुत से हैं| जो उनको पीते हैं, वे मतवाले होकर उस परमेश्वर के प्यारे हो जाते हैं| अर्थात सद्गुरु ने हमें वहाँ लेजा कर अपने जैसा बना लिया अर्थात सद्गुरु ने अपने में लीन कर लिया एवं मोक्ष पद को प्राप्त हो गए| प्रेम रुपी अमृत का प्याला पेट भर पिलाया और मस्त करके उस परम प्यारे ब्रम्ह में लीन कर दिया”)| तब पृथ्वी के वासियों को लगा कि उनके प्राणों की गति बिलकुल रुक गयी हैं यह देख कर बालक बहुत घबरा गए और महाराज जी के घर आकर उनकी माता से कहने लगे कि भुआ गरीबा मर गया एक दाढ़ी वाला बाबा आया था उसका झूठा दूध गरीबा ने पी लिया और वह मर गया”|यह सुनकर आचार्य गरीब दास जी महाराज के माता-पिता मुर्छित हो गए और सभी ग्राम वाले भी आचार्य गरीब दास जी महाराज से बहुत प्यार करते थे तो उनको भी बहुत बुरा लगा और सारे छुड़ानी धाम में शोक की लहर दोड़ गई सभी ग्रामवासी व माता-पिता उस स्थान पर पहुंचे जंहा आचार्य गरीब दास जी महाराज अचेत अवस्था में पड़े हुए थे | उस समय शोक मानो अपने दीर्घ समुदाय सहित उसी स्थान पर आ प्रकट हुआ था | तभी ग्राम के बड़े बुजर्गो ने आचार्य गरीब दास जी महाराज के माता-पिता को धर्य बंधाया और आचार्य गरीब दास जी महाराज के अंतिम संस्कार की तयारी करने लगे और महाराज जी को श्मशान भूमि पर ले गए और भूमि पर रख दिया
                 
इस अघटित घटना से सभी को आघात पहुंचा था | तभी आचार्य गरीब दास जी महाराज के पैर का अंगूठा हिलता दिखाई दिया और साथ ही उनके मुख से बंदी छोड़ व सत साहिबशब्द निकले | यह घटना देख कर सब के अंदर एक ख़ुशी की लहर उठ गयी तभी गरीब दास जी महाराज के बंधन खोल दिए गए बंधन खुलते ही आप उठ बैठे | माता-पिता ने आचार्य गरीब दास जी महाराज जी को सीने से लगा लिया और माता-पिता ने कहा बेटा यह तूने क्या किया हमे इतना दुःख क्यों दिया” | तब आचार्य गरीब दास जी महाराज ने आश्चर्य से कहा कि आप मुझे शमशान में ले आये मुझे मरा हुआ समझा !! मै तो सोया हुआ था” | यह सुनकर पिता जी ने कहा कि बेटा ऐसा सोना कैसा तेरी तो नाड़ी तक बंद हो गयी थी” | तब वँहा परस्पर बाते होती रही फिर सभी लोग गरीब दास जी महाराज के साथ घर वापिस आ गए | इस प्रकार एक बार फिर से प्रशन्ता की लहर ने छुड़ानी धाम पर कब्ज़ा  कर लिया |   


कोठी दयालदास (सदगुरू सन्त मंदिर)


कोठी दयालु दास (सदगुरू सन्त मंदिर) की आधार शिला मेला भाद्र पद शुदी दुतीया ईसवी सन १९७२ को रखी गई। जो इस समय एक भव्य विशाल रूप ले चूका। जहाँ सैकड़ों संत-महात्माओ के ठहरने की व्यवस्था है। सेवकों ने मंदिर में बड़ी ही सुंदर मूर्तियों की प्रतिस्ठा करवा रखी है। जहाँ विधि-विधान से नित्य प्रति आरती पूजा व सतगुरु जी की वाणी के अखंड पाठ होते है। 
 
वर्तमान समय में कोठी दयालुदास (सदगुरू सन्त मंदिर) का संचालन पूज्य स्वामी ब्रहमस्वरूप जी-पुजारी जी कर रहे है। पुजारी जी बहुत ही दयालु स्वभाव के और तन-मन-धन से कोठी दयालदास (सदगुरू सन्त मंदिर) अपनी सेवाएँ दे रहे है।

      

कबीर दर्शन स्थल
 कबीर दर्शन स्थल छुडानी धाम में कबलाना रोड पर स्थित है जिसका संचालन छुडानी धाम के पटवारी संतराम जी का परिवार कर रहा है। 

 


  
पहले यहाँ एक छोटी मंढ़ी हुआ करती थी जहाँ आज सर्व संगत के सहयोग से एक भव्य मंदिर का निर्माण हो चूका है और समय–समय पर बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी की वाणी का अखण्ड पाठ होता है ।

गरीबदासीय रामकुण्ड
गरीबदासीय रामकुण्ड छुडानी धाम में कबलाना रोड पर स्थित है जिसका संचालन छुडानी धाम के श्री संतराम पुत्र श्री कशी धनखड़ जी का परिवार कर रहा है। जहाँ प्रत्येक पूर्णिमा, तीनो मेलो पर सत्संग, कार्यक्रम होते है।
 


कबीर दर्शन स्थली 
कबीर दर्शन स्थली छुडानी धाम में कबलाना रोड पर स्थित है जिसका संचालन ट्रस्ट-देष सांझली संस्था के द्वारा किया जा रहा है।  समय–समय पर बन्दीछोड़ गरीब दास साहिब जी की वाणी का होता है। मंदिर का कुछ भाग बन चुका है और कुछ निर्माणाधीन है

                                





जैसी हमारी सोच थी, हमारे पास जानकारी थी उसके अनुसार हमने यह परम धाम श्री छुडानी धाम में स्थित सत्यपुरूष की संस्थाओं का वर्णन किया है। फिर भी यदि कोई गलती रह गई हो तो हम माफ़ी चहाते है क्युकी मनुष्य तो है ही गलतियों का पुतला।


 सर्व संगत को पाठी पंडित प्रेम सिंह गरीबदासीय ई-ग्रंथालय की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

       

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