Saturday, July 4, 2026

हंस! बदला तो तुम्हें चुकाना ही पड़ेगा

एक बार सद्गुरु बंदीछोड़ गरीब दास जी महाराज अपने शिष्यों सहित भरतपुर से वापस लौट रहे थे। मार्ग में चलते हुए उन्हें एक कुआं दिखाई दिया। सद्गुरु जी ने शिष्यों से कहा, "हम यहाँ कुछ देर विश्राम करेंगे, स्नान और जलपान करके फिर आगे की यात्रा पर चलेंगे।"

सद्गुरु जी की आज्ञा पाकर सभी शिष्य जल लेने और आस-पास घूमने निकल गए। वहीं कुछ दूरी पर एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था। वह अपने एक नए बैल को बार-बार डंडे से बुरी तरह पीट रहा था, इसके बावजूद वह बैल ठीक से नहीं चल रहा था। दयालु सद्गुरु जी टहलते हुए उस किसान के नजदीक पहुँच गए। 

Saturday, June 13, 2026

धन-धन स्वामी चेतन दास जी महाराज

 सत्यपुरुष सद्गुरु कबीर साहेब जी के ही साक्षात् स्वरूप आचार्य श्री गरीब दास साहिब जी की नादी परम्परा में धन धन स्वामी चेतन दास जी महाराज एक ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबदासीय वाणी के प्रचार-प्रसार, संपादन और साधना में समर्पित कर दिया।

 प्राकट्य, जन्म एवं बाल्यकाल

स्वामी चेतन दास जी महाराज का प्राकट्य वैशाख शुक्ल दशमी, ई. सन् 1870 (तदनुसार वर्ष 1927 विक्रमी, मंगलवार, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र) को श्री चोहला साहिब, अमृतसर (पंजाब) में एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में हुआ था आपके पिता का नाम लाला काकू राम जी तथा माता का नाम श्रीमती राधा जी था।

Sunday, February 15, 2026

।। उजड़े हुए उस खेत मध्य भी, नव अंकुर मुस्काए ।।

आई सद्गुरु बंदीछोड़ गरीबदास साहिब जी की बाल्य अवस्था की एक दिव्य लीला का वर्णन करते हैं। जिसमें सतगुरु जी ने एक उजड़े हुए खेत को फिर से हरा-भरा कर दिया।

नौ वर्ष की कोमल आयु, मुख पर अद्भुत तेज अपार।

गऊ चराने निकल पड़े, पिताश्री बलराम जी के लाल।


संग सखाओं की मधुर टोली, अधरों पर मधु-सी मुस्कान।

छुड़ानी धाम की गलियों में, गूँजे सत् साहिब का गान।।