Friday, May 19, 2017

मंगलाचरण (सरलार्थ)


प्रत्येक शुभ कार्य को प्रारम्भ करते समय बन्दीछोड़ गरीबदास साहिब जी की वाणी में से मंगलाचरण उच्चारण करना चाहिए। इसके उच्चारण करने से प्रत्येक शुभ कार्य खुशी-भरपूर पूर्ण होता है।

गरीबनमो नमो सत्पुरूष कूँनमस्कार गुरू कीन्ह ही ।
सुर नर मुनि जन साधवासंतों सरबस दीन्ह हीं ।1

सतगुरू देव गरीबदास महाराज जी सर्वप्रथम सत्यपुरूष साहिब को पुनः-पुनः नमन करते हैं। फिर गुरू देव को नमस्कार करते हैं। मनुष्यदेवतामननशील साधकसाधु जन सबके प्रति अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।



सतगुरू साहिब संत सबडण्डौतम् प्रणाम ।

आगे पीछे मध्य हुयेतिन कूं जां कुरबान ।2

सतगुरूसाहिब और सत्यवादी सन्तजनों को दण्डवत् प्रणाम हैजो पूर्व में हो चुके हैंजो भविष्य में होंगे और जो अब वर्तमान में मौजूद हैंउनसे मैं कुर्बान जाता हूं।


निराकार निरबिषंकाल जाल भय भंजनं ।

निरलेपं निज निरगुणंअकल अनूप बेसुन्न धुनि ।3

पारब्रह्म प्रभु जो आकार रहित हैविषयों से रहित हैउसका ध्यान करने से काल-जाल का भय समाप्त होता है। उस प्रभु को विश्व का कोई लेपन नहीं चढ़ता। वह प्रभु स्वयं के स्वरूप में स्थित रहता है। वह तीनों गुणों (सत्गुणरजोगुण एवं तमगुण) से परे हैं। संसार की कल्पना और उपमा से रहित हैं। वह अभाव रहित और शब्द रूप ब्रह्म हैं।


सोहं सुरति समापतंसकल समाना निरति लै ।

उज्जल हिरम्बर हरदमंबेपरवाह अथाह हैवार पार नही मध्यतं ।4

ऐसे प्रभु के ध्यान में अपनी सुर्ति को लीन करो क्योंकि जो पारब्रह्म प्रभु है वही प्राणी की अन्तरात्मा हैवह प्रभु सर्व व्यापक है। उसके ध्यान में अपनी सुर्ति-निरत को लीन करो। वह निर्मलसोने की तरह प्रकाशमानहर समय एक ही अवस्था में रहता है। वह बेपरवाह है। उसकी महिमा का कोई आदिमध्य अथवा अन्त नहीं पाया जा सकता।


गरीबजो सुमरत सिद्धि होईगण नायक गलताना।

करो अनुग्रह सोईपारस पद प्रवाना ।5

ऐसे प्रभु का सिमरन करने से समस्त कार्य सि होते हैं। वह प्रभु सब का मालिक है और सब में लीन है। पारस जैसे गुण वाले मालिक के समक्ष कृपा-याचना करो।


आदि गणेश मनाऊँगण नायक देवन देवा।

चरण कमल ल्यौ लाऊँआदि अंत कर हूँ सेवा ।6

वह प्रभु सर्वप्रथम है इसलिए उसे आदि गणेश कहा जाता हैवह सब देवों का देव और सब जीवों का मालिक है। मैं उसके चरण कमलों में ध्यान लगाता हूं और आदि से अन्त तक (सदैव उसकी सेवा करता रहूंगा।


परम शक्ति संगीतंरिद्धि सिद्धि दाता सोई ।

अविगत गुणह अतीतंसत्यपुरूष निर्मोही ।7

प्रभु परम शक्ति रूप सबके अंग-संग हैं और सब रिद्धियों-सिद्धियों का दाता है। उस अतीत पुरूष के गुणों को कोई नहीं जान सकता। उसे किसी के साथ मोह भी नहीं है।


जगदम्बा जगदीशंमंगल रूप मुरारी।

तन मन अरपूं शीशंभक्ति मुक्ति भंडारी ।8

वह प्रभु समस्त जगत् का मालिक और पालक है। वह मंगल रूप है। मुर नामक दैत्य को मारने के कारण उसका नाम मुरारी भी है। उस प्रभु को मैं अपना तनमनशीश अर्पण करता हूं। वह भक्ति-मुक्ति का भण्डार है।


सुरनर मुनिजन ध्यावैंब्रह्मा विष्णु महेशा ।

शेष सहंस मुख गावैंपूजैं आदि गणेशा ।9

उस साहिब का देवतामनुष्यमननशील साधक और ब्रह्माविष्णुमहेश ध्यान करते (पूजते हैं। शेषनाग जी हज़ारों मुखों से उस आदिगणेश की महिमा गाते हैं और उसकी पूजा करते हैं।


इन्द्र कुबेर सरीखावरूण धर्मराय ध्यावैं।

समरथ जीवन जीकामन इच्छ्या फल पावै।10

उस प्रभु को स्वर्ग लोक के राजा इन्द्रकुबेर भण्डारीवरूण देवधर्मराज जैसे पूजते हैं। वह समर्थ पुरूष सबका मालिक है और सबका जीवन है। उसका ध्यान करने से मनो-इच्छित (मनोवांछित) फल की प्राप्ति होती है।


तेतीस कोटि अधाराध्यावैं सहंस अठासी।

उतरैं भौ जल पाराकटि हैं जम की फांसी ।11

तैंतीस करोड़ देवता उसके आश्रय हैं और अट्ठासी हज़ार ऋषि उसकी पूजा करते हैं। उसका स्मरण करने वाले संसार सागर को पार कर लेते हैं और यमों की फांसी से उनका छुटकारा हो जाता है।

2 comments:

  1. पारब्रह्म प्रभु नराकार हैं, Make the correction Please

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  2. पारब्रह्म प्रभु जो आकार रहित है
    same meaning

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